India's Most Vibrant Literature Festival • 14th, 15th, 16th November 2025

न्यू एज राइटिंग


न्यू एज राइटिंग

न्यू एज राइटिंग के सत्र में उभरते लेखकों कपिल राज और विशाल पॉल ने आज के दौर में लेखन से जुड़ी चुनौतियों, बदलती प्रवृत्तियों और तकनीक के प्रभाव पर बेहद सारगर्भित चर्चा की। दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि आधुनिक समय में लेखन पहले जैसा नहीं रहा। नए टूल्स, नई शैलियाँ और बदलते पाठकीय व्यवहार ने लेखन की प्रकृति को काफी हद तक प्रभावित किया है, और इस परिवर्तन को समझना हर लेखक के लिए आवश्यक है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या AI लेखकों की जगह ले सकता है, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि AI आज हर क्षेत्र का हिस्सा बन चुका है और लेखन भी इससे अछूता नहीं है। लेकिन AI के साथ-साथ बढ़ते स्क्रीन टाइम ने पाठकों के अटेंशन स्पैन को कम कर दिया है। आज का पाठक लंबे समय तक एक ही विषय पर टिककर नहीं रहना चाहता, खासकर युवा पीढ़ी जो हर चीज़ तुरंत और संक्षेप में चाहती है। फिर भी दोनों लेखकों ने माना कि AI की अपनी उपयोगिता भी है—प्रूफरीडिंग, एडिटिंग, रिसर्च और प्रारंभिक ड्राफ्ट को बेहतर बनाने में इसके उपकरण लेखक का काम आसान करते हैं। इसलिए AI सही या गलत नहीं है; असल महत्व इस बात का है कि उसका उपयोग कितनी समझदारी से किया जा रहा है।

कपिल राज का मानना है कि AI की तुलना मानव मस्तिष्क से कभी नहीं की जा सकती। उनके अनुसार AI में इंसानोंजैसीभावनाऔरनएपन की कमी होती है, और वह केवल वही प्रस्तुत कर सकता है जिसकी उसे ट्रेनिंग दी गई है। इसी कारण वह इंसान की जगह नहीं ले सकता। हाँ, यह एक बेहतरीन सहायक बन सकता है जो लेखक को बिना अतिरिक्त खर्च के अपने लेखन को निखारने का अवसर देता है। वे कहते हैं कि AI उपयोगी अवश्य है, लेकिन इंसान की संवेदनाओं, अनुभवों और रचनात्मकता को वह अभी छू भी नहीं पा रहा है।

जब दोनों से पूछा गया कि उनका लेखन-सफ़र कैसे शुरू हुआ, तो कपिल राज ने पहले दर्शकों से सवाल किया कि मोबाइल के युग में कितने लोग अब भी किताबें पढ़ते हैं। 80% से अधिक हाथ उठते देख वे बेहद खुशी महसूस करते हैं और कहते हैं कि यह साहित्य की दुनिया के लिए एक सकारात्मक संकेत है। कपिल सामाजिक मुद्दों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य समाज में होने वाले अन्याय और गलतियों के खिलाफ एक ऐसी आवाज़ बनना है जो केवल विरोध न करे, बल्कि बदलाव की नींव डाले। उनकी पहली किताब ‘कुरूपा’ लिखने की प्रेरणा उन्हें निर्भया केस से मिली—एक ऐसा हादसा जिसने पूरे देश को झकझोर दिया और जिसने उनके भीतर लेखन के माध्यम से संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देने की तीव्र इच्छा पैदा की।

विशाल पॉल ने अपने लेखन सफर की कहानी बताते हुए कहा कि उनकी कहानियाँ भावनाओं से जन्म लेती हैं। वे उत्तर-पूर्व भारत से आते हैं—एक ऐसा क्षेत्र जहाँ कई जनजातियाँ रहती हैं, समृद्ध संस्कृति बसती है और अनगिनत लोककथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूप से आगे बढ़ती रही हैं। उन्होंने बचपन से महसूस किया कि उनके क्षेत्र की कहानियों को सुरक्षित रखने का कोई ठोस माध्यम नहीं था। लोककथाएँ केवल सुनी जाती थीं, लिखी नहीं जाती थीं। इसी विचार ने उन्हें लेखन की ओर प्रेरित किया ताकि वे अपने लोगों, अपनी संस्कृति और अपनी जड़ों को एक पहचान दे सकें। उनके अनुसार लिखना केवल पेशा नहीं, बल्कि वह माध्यम है जिसके द्वारा कहानियाँ जीवन पाती हैं। वे कहते हैं कि लेखन अनुशासन मांगता है और इसी अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने ने उन्हें लेखक बनाया।

न्यू एज राइटिंग पर अपने विचार साझा करते हुए दोनों लेखकों ने कहा कि आज का लेखन पुराने ढाँचों को तोड़कर आगे बढ़ रहा है। पहले कहानियों में एक तय प्लॉट, चरित्रों का विस्तृत विकास और एक व्यवस्थित संरचना होती थी। आज की पीढ़ी ऐसी कहानियाँ पसंद करती है जिनमें भावनाएँ सच्ची हों, अनुभव निजी हों और अभिव्यक्ति ईमानदार हो। विशाल के अनुसार नई पीढ़ी अधिक आत्मसजग है और वह जानती है कि उसे क्या पढ़ना है। वहीं कपिल नए लेखकों से आग्रह करते हैं कि वे अपने मन की बातें खुलकर लिखें—चाहे विषय कितना भी संवेदनशील क्यों न हो, चाहे वह सुंदरता से जुड़ा हो, दर्द से, सामाजिक मुद्दों से, धर्म से, किसी गृहणी की निजी कहानी से या किसी ऐसे अनुभव से जो अक्सर अनसुना रह जाता है। वे कहते हैं कि किताबों में अपने नज़रिए को आवाज़ दें, दुनिया को देखने के अपने अंदाज़ को शब्दों में पिरोएँ और वह लिखें जैसा आप इस दुनिया को देखते हैं या जैसा देखना चाहते हैं।

विशाल ने आगे बताया कि उन्हें यात्रा का बेहद शौक है और यही यात्राएँ उनके लेखन का सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत हैं। अलग-अलग जगहों की मिट्टी, वहाँ के लोग, उनकी कहानियाँ, उनकी बोलियाँ और उनकी संस्कृतियाँ उन्हें लगातार नई कहानियाँ देती रहती हैं। उनके अनुसार यात्रा करना दुनिया को महसूस करने और समझने का तरीका है, और यही अनुभूतियाँ उनकी लेखनी को समृद्ध बनाती हैं।यहीकारणहैकिसालमेंएकबारवोएकअनजानलोगोंकेसमूहकेसाथट्रिपपरजरूरजातेहै, नएलोगोंसेमिलकरउन्हेंइंसानकोसमझनेकानयानजरियामिलताहैऔरइसनजरिएकोवोअपनेलेखनमेंइस्तेमालकरतेहै।अनजान लोगों के साथ यात्रा करने से उन्हें समझने में आसानी होती है कि इंसान कैसे होते हैं, कैसे व्यवहार करते हैं और किस तरह की परिस्थितियों में कैसी भावनाएँ उभरती हैं। यही सब वे अपनी कहानियों में उतारते हैं। उनकी किताब "द लायर अमंग अस"एक स्कूल आधारित पैरानॉर्मल कहानी है, जिसके लिए वे कई स्कूलों में गए, बच्चों से मिले और अपने अनुभवों को जोड़कर कहानी का निर्माण किया।

अंत में दोनों लेखकों ने युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि आज की जनरेशन अधिक self-aware है, अपने सपनों के लिए समझौता नहीं करती और अपने लक्ष्यों के पीछे पूरी दृढ़ता से भागती है, जो एक बेहद अच्छी बात है। हर किसी के पास अपने सपनों का इंतज़ार करने के लिए समय नहीं होता, इसलिए इस ऊर्जा, इस जज़्बे को हमेशा संजोकर रखना चाहिए। उनके अनुसार युवाओं को चाहिए कि वे अधिक से अधिक किताबें पढ़ें, खुद से सोचें, खुद को समझें और सबसे महत्वपूर्ण—खुद पर विश्वास रखें।